विकास और पर्यावरण
विकास (Development) का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि या GDP में वृद्धि नहीं है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता, गरिमा, अवसर, रोजगार और पर्यावरणीय गुणवत्ता भी शामिल हैं।
- परंपरागत विकास के संकेतक
- औद्योगीकरण
- नगरीकरण
- आधारभूत संरचना
- उत्पादन में वृद्धि
- आय और उपभोग में वृद्धि
- पर्यावरणीय चुनौती
यदि विकास के परिणामस्वरूप:
- प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो,
- प्रदूषण बढ़े,
- जैव विविधता कम हो,
- जलवायु परिवर्तन तेज हो,
- स्थानीय समुदाय विस्थापित हों,
तो ऐसा विकास दीर्घकाल में सतत नहीं माना जाएगा।
सतत विकास
सतत विकास (Sustainable Development) की लोकप्रिय परिभाषा ब्रुंटलैंड रिपोर्ट Our Common Future, 1987 से संबंधित है।
ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता न करे।
- सतत विकास के तीन स्तंभ
- आर्थिक सततता (Economic Sustainability)
- सामाजिक सततता (Social Sustainability)
- पर्यावरणीय सततता (Environmental Sustainability)
- प्रमुख सिद्धांत
- अंतर-पीढ़ीगत समानता
- अंतःपीढ़ीगत समानता
- सावधानी का सिद्धांत
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
- वहन क्षमता
- संसाधन दक्षता
- जनभागीदारी
- जैव विविधता संरक्षण
- समान किंतु विभेदित उत्तरदायित्व
- सतत उपभोग एवं उत्पादन
- 3.1 अंतर-पीढ़ीगत समानता
अंतर-पीढ़ीगत समानता (Intergenerational Equity) का अर्थ वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के बीच संसाधनों एवं पर्यावरणीय अवसरों की समानता है।
- 3.2 अंतःपीढ़ीगत समानता
अंतःपीढ़ीगत समानता (Intragenerational Equity) का अर्थ वर्तमान पीढ़ी के विभिन्न देशों और सामाजिक समूहों के बीच न्याय है।
- 3.3 सावधानी का सिद्धांत
यदि किसी गतिविधि से गंभीर पर्यावरणीय हानि की संभावना है, तो पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता का अभाव रोकथाम संबंधी कार्रवाई को टालने का आधार नहीं होना चाहिए।
- 3.4 प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
प्रदूषण करने वाले व्यक्ति या संस्था को प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई का खर्च उठाना चाहिए।
- 3.5 वहन क्षमता
किसी पारितंत्र की वह अधिकतम जनसंख्या या गतिविधि जिसे वह गंभीर और दीर्घकालीन क्षति के बिना सहन कर सकता है।
- परीक्षा में भ्रम
सतत विकास का अर्थ विकास को रोकना नहीं है। इसका अर्थ विकास को पर्यावरण-सम्मत, समावेशी और संसाधन-दक्ष बनाना है।
सहस्राब्दी विकास लक्ष्य
सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (Millennium Development Goals—MDGs) संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी घोषणा, 2000 के बाद निर्धारित किए गए थे।
- कुल लक्ष्य: 8
- लक्ष्य अवधि: 2000–2015
- आठ MDGs
- स्मरण सूत्र
सतत विकास लक्ष्य
सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals—SDGs) वर्ष 2015 में सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के अंतर्गत अपनाए गए।
- कुल लक्ष्य: 17
- कुल लक्ष्य-बिंदु: 169
- प्रभावी अवधि: 2016–2030
- सभी देशों पर लागू
- मुख्य सिद्धांत: किसी को पीछे न छोड़ना
- सभी 17 SDGs
- SDGs के पाँच स्तंभ
- लोग + पृथ्वी + समृद्धि + शांति + साझेदारी
- पर्यावरण से सीधे संबंधित लक्ष्य
- SDG 6 — स्वच्छ जल और स्वच्छता
- SDG 7 — स्वच्छ ऊर्जा
- SDG 11 — सतत शहर
- SDG 12 — उत्तरदायी उपभोग और उत्पादन
- SDG 13 — जलवायु कार्रवाई
- SDG 14 — जल के नीचे जीवन
- SDG 15 — स्थल पर जीवन
MDGs और SDGs में अंतर
- परीक्षा में भ्रम
MDGs की संख्या 8 थी।
SDGs की संख्या 17 है।
SDGs ने MDGs का स्थान लिया।
SDGs केवल विकासशील देशों के लिए नहीं हैं।
“जल के नीचे जीवन” और “स्थल पर जीवन” SDGs हैं, MDGs नहीं।
मानव–पर्यावरण अंतःक्रिया
मानव अपनी आवश्यकताओं के लिए पर्यावरण पर निर्भर है:
- भोजन
- जल
- ऊर्जा
- भूमि
- खनिज
- वन उत्पाद
- पारितंत्रीय सेवाएँ
मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण को सकारात्मक और नकारात्मक—दोनों प्रकार से प्रभावित कर सकती हैं।
- सकारात्मक गतिविधियाँ
- वनीकरण
- वर्षा जल संचयन
- नवीकरणीय ऊर्जा
- जैविक खेती
- अपशिष्ट पुनर्चक्रण
- आर्द्रभूमि संरक्षण
- वन्यजीव संरक्षण
- नकारात्मक गतिविधियाँ
- वनों की कटाई
- अत्यधिक खनन
- जीवाश्म ईंधन का दहन
- औद्योगिक अपशिष्ट
- अत्यधिक भूजल दोहन
- प्लास्टिक प्रदूषण
- अनियोजित नगरीकरण
- अत्यधिक मछली पकड़ना
मानवजनित गतिविधियाँ
मानवजनित (Anthropogenic) का अर्थ ऐसी गतिविधियों से है जिनका स्रोत मानव है।
- IPAT समीकरण
जहाँ:
- अर्थ
पर्यावरणीय प्रभाव केवल जनसंख्या से निर्धारित नहीं होता। उपभोग के स्तर और उपयोग की जाने वाली तकनीक की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पर्यावरणीय समस्याओं का स्तर
- स्थानीय समस्याएँ
- स्थानीय जल प्रदूषण
- शहरी ध्वनि प्रदूषण
- ठोस अपशिष्ट
- घर के अंदर वायु प्रदूषण
- क्षेत्रीय समस्याएँ
- अम्ल वर्षा
- नदी बेसिन प्रदूषण
- मरुस्थलीकरण
- सीमा-पार धुंध
- वैश्विक समस्याएँ
- जलवायु परिवर्तन
- ओजोन परत का क्षरण
- जैव विविधता हानि
- महासागरीय अम्लीकरण
- परीक्षा बिंदु
प्रदूषक का स्रोत स्थानीय हो सकता है, लेकिन उसका प्रभाव क्षेत्रीय या वैश्विक हो सकता है।
वायु प्रदूषण
वायुमंडल में हानिकारक पदार्थों की ऐसी उपस्थिति या सांद्रता, जो मानव स्वास्थ्य, पारितंत्र या पदार्थों को नुकसान पहुँचाए, वायु प्रदूषण कहलाती है।
- प्रमुख प्रदूषक
- प्राथमिक प्रदूषक
जो सीधे स्रोत से उत्सर्जित होते हैं।
उदाहरण: CO, SO₂, NO और कण पदार्थ।
- द्वितीयक प्रदूषक
जो वायुमंडल में रासायनिक अभिक्रियाओं से बनते हैं।
उदाहरण: धरातलीय ओजोन और PAN।
स्मॉग
- परंपरागत या लंदन स्मॉग
- ठंडे और आर्द्र वातावरण में
- कोयले का धुआँ और SO₂
- सल्फ्यूरस या अपचायक स्मॉग
- प्रकाश-रासायनिक स्मॉग
- सूर्य का प्रकाश
- नाइट्रोजन ऑक्साइड
- वाष्पशील कार्बनिक यौगिक
- धरातलीय ओजोन और PAN
अम्ल वर्षा
अम्ल वर्षा मुख्यतः निम्न प्रदूषकों से संबंधित है:
- सल्फर डाइऑक्साइड
- नाइट्रोजन ऑक्साइड
ये वायुमंडल में सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल बना सकते हैं।
- प्रभाव
- मिट्टी एवं जल का अम्लीकरण
- वनों को नुकसान
- जलीय जीवों को नुकसान
- भवनों एवं स्मारकों का क्षरण
- परीक्षा में भ्रम
CO₂ जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रमुख गैस है, लेकिन अम्ल वर्षा के मुख्य पूर्वगामी SO₂ और NOₓ हैं।
जल प्रदूषण
जल की भौतिक, रासायनिक या जैविक विशेषताओं में हानिकारक परिवर्तन को जल प्रदूषण कहते हैं।
- प्रमुख स्रोत
- घरेलू मल-जल
- औद्योगिक अपशिष्ट
- कृषि अपवाह
- तेल रिसाव
- तापीय अपशिष्ट
- खनन अपशिष्ट
- रोगजनक सूक्ष्मजीव
- प्लास्टिक
- 13.1 घुलित ऑक्सीजन
घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen—DO) जल में उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा है।
अधिक DO सामान्यतः जलीय जीवन के लिए बेहतर है।
अत्यधिक जैविक प्रदूषण से DO कम हो सकती है।
- 13.2 जैविक ऑक्सीजन माँग
BOD वह ऑक्सीजन है जिसकी आवश्यकता सूक्ष्मजीवों को जैव-अपघटनीय कार्बनिक पदार्थों को विघटित करने के लिए होती है।
- 13.3 रासायनिक ऑक्सीजन माँग
COD जल में उपस्थित ऑक्सीकरण योग्य पदार्थों को रासायनिक रूप से oxidise करने के लिए आवश्यक oxygen equivalent है।
- मुख्य संबंध
सुपोषण
जल में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्त्वों की अधिकता से शैवाल की अत्यधिक वृद्धि को सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं।
- प्रक्रिया
जैव-संचयन और जैव-आवर्धन
- जैव-संचयन
किसी एक जीव के शरीर में समय के साथ विषैले पदार्थ का एकत्रित होना।
- जैव-आवर्धन
खाद्य शृंखला के ऊँचे पोषण स्तरों पर किसी गैर-जैव-अपघटनीय प्रदूषक की सांद्रता का बढ़ना।
उदाहरण: पारा और DDT।
- अंतर
मृदा प्रदूषण एवं भूमि क्षरण
- कारण
- अत्यधिक कीटनाशक और उर्वरक
- औद्योगिक अपशिष्ट
- खनन
- प्लास्टिक और ई-कचरा
- लवणीकरण
- वनों की कटाई
- अत्यधिक चराई
- अनुचित सिंचाई
- प्रभाव
- मृदा उर्वरता में कमी
- भूजल प्रदूषण
- खाद्य शृंखला में विषैले पदार्थ
- मृदा अपरदन
- मरुस्थलीकरण
- सूक्ष्मजीवों की हानि
- नियंत्रण
- जैविक खाद
- समेकित कीट प्रबंधन
- फसल चक्र
- वनीकरण
- नियंत्रित चराई
- वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान
ध्वनि प्रदूषण
अनचाही या अप्रिय ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।
- मापन इकाई
- डेसीबल (dB)
- स्रोत
- यातायात
- विमान
- उद्योग
- निर्माण कार्य
- लाउडस्पीकर
- जनरेटर
- स्वास्थ्य प्रभाव
- श्रवण क्षमता में कमी
- तनाव
- नींद में बाधा
- उच्च रक्तचाप
- एकाग्रता में कमी
- संचार में बाधा
- परीक्षा बिंदु
डेसीबल मापक्रम सरल रेखीय नहीं, बल्कि लघुगणकीय (Logarithmic) है।
अपशिष्ट के प्रकार
- ठोस अपशिष्ट
- घरेलू कचरा
- वाणिज्यिक कचरा
- निर्माण अपशिष्ट
- कृषि अपशिष्ट
- नगरपालिका अपशिष्ट
- तरल अपशिष्ट
- मल-जल
- औद्योगिक द्रव
- रासायनिक अपशिष्ट
- तेलयुक्त अपशिष्ट
- जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट
निदान, उपचार, टीकाकरण या जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान से उत्पन्न अपशिष्ट।
उदाहरण: सुई, संक्रमित पट्टियाँ और रोग-संबंधी अपशिष्ट।
- खतरनाक अपशिष्ट
विषैला, संक्षारक, ज्वलनशील या प्रतिक्रियाशील अपशिष्ट।
- इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट
त्यागे गए विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
उदाहरण: मोबाइल, कंप्यूटर, बैटरी और सर्किट बोर्ड।
- ई-कचरे के खतरनाक तत्त्व
- सीसा
- पारा
- कैडमियम
- ब्रोमीनयुक्त पदार्थ
अपशिष्ट प्रबंधन पदानुक्रम
- प्रमुख विधियाँ
- परीक्षा में भ्रम
खुले में कचरा डालना और वैज्ञानिक लैंडफिल समान नहीं हैं।
भस्मीकरण से अपशिष्ट की मात्रा घटती है, लेकिन emission control आवश्यक है।
जैव-चिकित्सकीय और खतरनाक कचरे को सामान्य कचरे में नहीं मिलाना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) तापमान और मौसम प्रतिरूपों में दीर्घकालीन परिवर्तन है। वर्तमान तीव्र उष्णता वृद्धि का प्रमुख कारण मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन है।
- प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें
- कार्बन डाइऑक्साइड
- मीथेन
- नाइट्रस ऑक्साइड
- जलवाष्प
- ओजोन
- फ्लोरीनयुक्त गैसें
- प्रमुख स्रोत
- ग्रीनहाउस प्रभाव
प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को रहने योग्य तापमान प्रदान करता है। मानवजनित उत्सर्जन से इसका बढ़ना वर्धित ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है।
- परीक्षा में भ्रम
ग्रीनहाउस प्रभाव स्वयं पूर्णतः हानिकारक नहीं है। समस्या इसका मानवजनित रूप से अत्यधिक बढ़ना है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- ताप लहरें
- हिमनदों का पीछे हटना
- समुद्र स्तर में वृद्धि
- वर्षा के प्रतिरूप में परिवर्तन
- बाढ़ एवं सूखे का जोखिम
- कृषि उत्पादकता पर प्रभाव
- जल असुरक्षा
- जैव विविधता की हानि
- स्वास्थ्य जोखिम
- जलवायु-प्रेरित विस्थापन
शमन और अनुकूलन
शमन कारणों को कम करता है; अनुकूलन परिणामों का सामना करता है।
जलवायु परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक आयाम
- आर्थिक आयाम
- कृषि और आजीविका की हानि
- आधारभूत संरचना की क्षति
- स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि
- ऊर्जा परिवर्तन की लागत
- हरित रोजगार और नवाचार
- सामाजिक आयाम
- असमान संवेदनशीलता
- खाद्य एवं जल असुरक्षा
- विस्थापन
- लैंगिक प्रभाव
- स्वास्थ्य असमानता
- तटीय एवं आदिवासी समुदायों पर प्रभाव
- राजनीतिक आयाम
- अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता
- जलवायु वित्त
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- ऐतिहासिक उत्तरदायित्व
- कार्बन बाजार
- ऊर्जा सुरक्षा
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग
- जलवायु न्याय
जिन समुदायों और देशों का जलवायु परिवर्तन में योगदान कम है, वे भी इसके गंभीर प्रभावों का सामना कर सकते हैं।
- समान किंतु विभेदित उत्तरदायित्व
पर्यावरण और जलवायु संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है।
सभी देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी और क्षमता समान नहीं है।
इसलिए उनकी भूमिकाओं में अंतर हो सकता है।
प्रदूषक और मानव स्वास्थ्य
प्राकृतिक एवं ऊर्जा संसाधन
- नवीकरणीय संसाधन
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जल विद्युत
- बायोमास
- भू-तापीय ऊर्जा
- अनवीकरणीय संसाधन
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
- यूरेनियम
- परीक्षा बिंदु
परमाणु ऊर्जा को सामान्यतः अनवीकरणीय माना जाता है क्योंकि यूरेनियम सीमित संसाधन है, यद्यपि संचालन के दौरान इसका कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
सौर ऊर्जा
सूर्य के विकिरण से प्राप्त ऊर्जा।
- प्रकार
- सौर फोटोवोल्टिक
- सौर तापीय
- केंद्रित सौर ऊर्जा
- लाभ
- नवीकरणीय
- कम संचालन उत्सर्जन
- विकेंद्रीकृत उत्पादन में उपयोगी
- सीमाएँ
- मौसम और दिन के समय पर निर्भरता
- ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता
- भूमि एवं सामग्री की आवश्यकता
- प्रारंभिक लागत
पवन ऊर्जा
चलती वायु से टरबाइन चलाकर बिजली उत्पन्न की जाती है।
- लाभ
- नवीकरणीय
- कम संचालन उत्सर्जन
- कम जल उपयोग
- सीमाएँ
- उत्पादन में परिवर्तनशीलता
- स्थान-विशिष्ट
- ग्रिड एकीकरण की आवश्यकता
- पक्षियों और चमगादड़ों पर संभावित प्रभाव
जल विद्युत
बहते या गिरते जल से ऊर्जा उत्पादन।
- लाभ
- नवीकरणीय
- लचीला विद्युत उत्पादन
- सिंचाई एवं जल-संग्रह के लाभ संभव
- सीमाएँ
- समुदायों का विस्थापन
- आवास विखंडन
- नदी के प्राकृतिक प्रवाह में परिवर्तन
- जलीय पारितंत्र पर प्रभाव
नवीकरणीय ऊर्जा का अर्थ पर्यावरणीय प्रभाव से पूर्णतः मुक्त होना नहीं है।
भू-तापीय ऊर्जा
पृथ्वी की आंतरिक गर्मी से प्राप्त ऊर्जा।
- लाभ
- अपेक्षाकृत निरंतर ऊर्जा
- कम संचालन उत्सर्जन
- सीमाएँ
- स्थान-विशिष्ट
- अधिक प्रारंभिक लागत
- द्रव प्रबंधन और प्रेरित भूकंपीयता की संभावना
बायोमास ऊर्जा
जैविक पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा।
उदाहरण: फसल अवशेष, लकड़ी, पशु अपशिष्ट और बायोगैस।
- लाभ
- अपशिष्ट का उपयोग
- ग्रामीण ऊर्जा में उपयोगी
- ऊर्जा संग्रहित की जा सकती है
- सीमाएँ
- अनुचित दहन से प्रदूषण
- भूमि पर दबाव
- वनों की कटाई का खतरा
- प्रत्येक बायोमास स्वतः कार्बन-तटस्थ नहीं होता
परमाणु ऊर्जा
नाभिकीय विखंडन से प्राप्त ऊर्जा।
- लाभ
- अधिक ऊर्जा घनत्व
- संचालन में अपेक्षाकृत कम कार्बन उत्सर्जन
- निरंतर ऊर्जा उत्पादन
- चुनौतियाँ
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट
- दुर्घटना का जोखिम
- अधिक पूँजीगत लागत
- संयंत्र बंद करने की लागत
- सुरक्षा एवं प्रसार संबंधी चिंताएँ
वन संसाधन
- पारिस्थितिक कार्य
- कार्बन का अवशोषण
- जैव विविधता संरक्षण
- मृदा संरक्षण
- जल चक्र का नियमन
- स्थानीय जलवायु नियंत्रण
- सामाजिक-आर्थिक कार्य
- लकड़ी और गैर-काष्ठ उत्पाद
- ईंधन
- आजीविका
- सांस्कृतिक मूल्य
- प्रमुख खतरे
- वनों की कटाई
- आवास विखंडन
- वनाग्नि
- खनन
- अतिक्रमण
- आक्रामक प्रजातियाँ
मिट्टी एक प्राकृतिक संसाधन
मिट्टी निम्न कार्यों में महत्वपूर्ण है:
- कृषि
- पोषक चक्र
- जल निस्यंदन
- कार्बन संग्रह
- जैव विविधता
- संरक्षण उपाय
- समोच्च जुताई
- सीढ़ीदार खेती
- रक्षक वृक्ष-पंक्तियाँ
- वनीकरण
- फसल चक्र
- मल्चिंग
- नियंत्रित चराई
प्राकृतिक संकट एवं आपदा
- संकट
ऐसी संभावित घटना या परिस्थिति जो नुकसान पहुँचा सकती है।
- आपदा
जब कोई संकट संवेदनशील और उजागर समुदाय को उसकी सामना करने की क्षमता से अधिक प्रभावित करता है, तो वह आपदा बनता है।
- आपदा जोखिम सूत्र
- परीक्षा बिंदु
प्रत्येक प्राकृतिक संकट आवश्यक रूप से आपदा नहीं बनता।
संकटों के प्रकार
- भूगर्भीय
- भूकंप
- सुनामी
- भूस्खलन
- ज्वालामुखी
- जल-मौसम संबंधी
- बाढ़
- चक्रवात
- सूखा
- ताप लहर
- बादल फटना
- जैविक
- महामारी
- संक्रामक रोग
- कीट प्रकोप
- मानवजनित एवं तकनीकी
- औद्योगिक दुर्घटना
- रासायनिक रिसाव
- परमाणु दुर्घटना
- आग
- तेल रिसाव
आपदा प्रबंधन चक्र
रोकथाम
आपदा जोखिम को उत्पन्न होने से रोकना।
शमन
संभावित हानि को कम करना।
उदाहरण: भूकंप-रोधी भवन।
तैयारी
आपदा से पहले आवश्यक तैयारी।
उदाहरण: प्रशिक्षण, अभ्यास और चेतावनी प्रणाली।
प्रतिक्रिया
आपदा के दौरान और तुरंत बाद की कार्रवाई।
उदाहरण: बचाव, राहत और चिकित्सा सहायता।
पुनर्प्राप्ति
सामान्य सेवाओं और कार्यप्रणाली को पुनः स्थापित करना।
पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण
आजीविका और आधारभूत संरचना का दीर्घकालीन पुनर्निर्माण।
आपदा से पहले: रोकथाम + शमन + तैयारी आपदा के बाद: प्रतिक्रिया + पुनर्प्राप्ति + पुनर्वास
संकट-विशिष्ट शमन रणनीतियाँ
- संरचनात्मक उपाय
भौतिक एवं अभियांत्रिकीय उपाय।
- गैर-संरचनात्मक उपाय
नीति, प्रशिक्षण, जागरूकता, बीमा, चेतावनी और भूमि उपयोग नियोजन।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 को भारत का व्यापक या छत्र कानून माना जाता है।
- प्रमुख प्रावधान
- पर्यावरण का संरक्षण एवं सुधार
- केंद्र सरकार को व्यापक शक्तियाँ
- पर्यावरणीय गुणवत्ता के मानक
- उद्योगों के स्थान और संचालन का नियमन
- खतरनाक पदार्थों का नियंत्रण
- निरीक्षण और सूचना प्राप्त करने की शक्ति
- उल्लंघन की स्थिति में निर्देश जारी करने की शक्ति
- ऐतिहासिक संबंध
- स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
- भोपाल गैस त्रासदी के बाद व्यापक पर्यावरणीय कानून की आवश्यकता
प्रमुख पर्यावरणीय कानून
- स्मरण क्रम
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (NAPCC) वर्ष 2008 में प्रारंभ हुई। इसमें परंपरागत रूप से आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।
- आठ राष्ट्रीय मिशन
- राष्ट्रीय सौर मिशन
- संवर्धित ऊर्जा दक्षता हेतु राष्ट्रीय मिशन
- सतत आवास हेतु राष्ट्रीय मिशन
- राष्ट्रीय जल मिशन
- हिमालयी पारितंत्र को बनाए रखने हेतु राष्ट्रीय मिशन
- हरित भारत मिशन
- सतत कृषि हेतु राष्ट्रीय मिशन
- जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान हेतु राष्ट्रीय मिशन
- स्मरण क्रम
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौते
- स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972
- मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन
- प्रमुख वैश्विक पर्यावरणीय सम्मेलन
- UNEP की स्थापना से संबंधित
- 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987
- ओजोन परत का संरक्षण
- ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध समाप्त करना
- CFCs और halons से संबंधित
- रियो पृथ्वी सम्मेलन, 1992
प्रमुख परिणाम:
- रियो घोषणा
- एजेंडा 21
- UNFCCC
- जैव विविधता अभिसमय
- वन सिद्धांत
- जैव विविधता अभिसमय, 1992
- तीन उद्देश्य
- जैव विविधता संरक्षण
- जैव संसाधनों का सतत उपयोग
- आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों का उचित बँटवारा
- क्योटो प्रोटोकॉल, 1997
- UNFCCC के अंतर्गत
- विकसित देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य
- बाजार-आधारित व्यवस्थाएँ
- क्योटो तंत्र
- उत्सर्जन व्यापार
- स्वच्छ विकास तंत्र
- संयुक्त क्रियान्वयन
- पेरिस समझौता, 2015
- COP21 में अपनाया गया
- वैश्विक ताप वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखना
- 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास
- राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान
- शमन, अनुकूलन और जलवायु वित्त
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन
- भारत और फ्रांस की पहल
- COP21 के दौरान 2015 में घोषणा
- सौर ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा
- मुख्यालय भारत में
अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का कालक्रम
- परीक्षा में भ्रम
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन से संबंधित है।
क्योटो और पेरिस जलवायु परिवर्तन से संबंधित हैं।
जैव विविधता अभिसमय रियो प्रक्रिया से जुड़ा है।
रियो सम्मेलन क्योटो प्रोटोकॉल से पहले हुआ था।
पेरिस समझौता राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान से संबंधित है।
सत्यापित पिछले वर्षों के प्रश्न
MDGs का उनके उद्देश्यों से मिलान कीजिए:
- विकल्प
- A–I, B–III, C–II, D–IV
- A–II, B–IV, C–III, D–I
- A–III, B–IV, C–I, D–II
- A–IV, B–II, C–I, D–III
व्याख्या: MDG 1 गरीबी, MDG 2 प्राथमिक शिक्षा, MDG 3 लैंगिक समानता और MDG 4 बाल मृत्यु दर से संबंधित था।
पुराने से नवीन क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
A. पेरिस समझौता B. जैव विविधता अभिसमय C. क्योटो प्रोटोकॉल D. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल E. स्टॉकहोम सम्मेलन
- विकल्प
- B, D, C, E, A
- B, C, D, E, A
- E, D, C, B, A
- E, D, B, C, A
समझौते का संबंधित प्रावधान से मिलान कीजिए:
- विकल्प
- A–III, B–II, C–I, D–IV
- A–II, B–III, C–I, D–IV
- A–II, B–IV, C–III, D–I
- A–III, B–IV, C–I, D–II
वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखने का निर्णय किस समझौते में लिया गया?
- पेरिस समझौता
- क्योटो प्रोटोकॉल
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- रियो सम्मेलन
व्याख्या: पेरिस समझौते में ताप वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखने तथा 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास शामिल है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 पर्यावरण संरक्षण के संबंध में भारत की किस अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता से जुड़ा है?
- वियना अभिसमय, 1985
- लंबी दूरी के सीमा-पार वायु प्रदूषण संबंधी अभिसमय
- CITES
- मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, स्टॉकहोम, 1972
कानूनों का उनके वर्ष से मिलान कीजिए:
- विकल्प
- A–I, B–III, C–II, D–IV
- A–II, B–IV, C–III, D–I
- A–III, B–II, C–I, D–IV
- A–II, B–III, C–IV, D–I
PYQ प्रवृत्ति विश्लेषण
दिसंबर 2026 के संभावित प्रश्न
MDGs और SDGs के संबंध में सही कथन कौन-सा है?
A. MDGs में 17 और SDGs में 8 लक्ष्य हैं। B. दोनों में समान लक्ष्य हैं। C. MDGs में 8 और SDGs में 17 लक्ष्य हैं। D. SDGs की अवधि 2015 में समाप्त हो गई।
“किसी को पीछे न छोड़ना” किससे संबंधित है?
A. क्योटो प्रोटोकॉल B. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल C. 2030 एजेंडा एवं SDGs D. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
उत्तरदायी उपभोग एवं उत्पादन किस SDG से संबंधित है?
- A. SDG 7 B. SDG 10 C. SDG 12 D. SDG 15
जल में उच्च BOD सामान्यतः किसका संकेत है?
A. कार्बनिक पदार्थ का अभाव B. अधिक कार्बनिक प्रदूषण C. अत्यधिक घुलित ऑक्सीजन D. सूक्ष्मजीवों का अभाव
प्रकाश-रासायनिक स्मॉग मुख्यतः किस संयोजन से बनता है?
A. SO₂ और कोहरा B. NOₓ, VOCs और सूर्य का प्रकाश C. CO₂ और वर्षा D. मीथेन और हिमपात
प्रदूषक की सांद्रता प्लवक से छोटी मछली और फिर बड़ी मछली तक बढ़ती है। इसे क्या कहेंगे?
- A. केवल जैव-संचयन B. जैव-आवर्धन C. सुपोषण D. मरुस्थलीकरण
निम्न में कौन-सा जलवायु अनुकूलन का उदाहरण है?
A. कोयले के स्थान पर सौर ऊर्जा B. औद्योगिक ऊर्जा दक्षता C. सूखा-रोधी फसलों का विकास D. वन कार्बन भंडार बढ़ाना
कथन I: प्रत्येक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना पर्यावरणीय प्रभाव से मुक्त होती है। कथन II: जल विद्युत परियोजना आवास और स्थानीय समुदायों को प्रभावित कर सकती है।
A. दोनों कथन सही B. दोनों कथन गलत C. कथन I सही, कथन II गलत D. कथन I गलत, कथन II सही
निम्न में कौन-सा NAPCC के मूल आठ मिशनों में शामिल नहीं है?
A. राष्ट्रीय सौर मिशन B. राष्ट्रीय जल मिशन C. हरित भारत मिशन D. राष्ट्रीय महासागर सफाई मिशन
ओजोन-क्षयकारी पदार्थों से संबंधित समझौता कौन-सा है?
A. पेरिस समझौता B. क्योटो प्रोटोकॉल C. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल D. जैव विविधता अभिसमय
क्योटो प्रोटोकॉल के तंत्रों का सही समूह कौन-सा है?
A. NDC, अनुकूलन और जलवायु वित्त B. उत्सर्जन व्यापार, CDM और संयुक्त क्रियान्वयन C. एजेंडा 21, CBD और वन सिद्धांत D. पुनर्चक्रण, कम्पोस्टिंग और लैंडफिल
भूकंप-रोधी भवन निर्माण किसका उदाहरण है?
- A. आपदा प्रतिक्रिया B. पुनर्वास C. आपदा शमन D. राहत वितरण
आपदा जोखिम के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
A. क्षमता बढ़ने से जोखिम बढ़ता है। B. प्रत्येक संकट अनिवार्य रूप से आपदा बनता है। C. संकट, उद्भासन और संवेदनशीलता बढ़ने पर जोखिम बढ़ता है। D. संवेदनशीलता की कोई भूमिका नहीं है।
अपशिष्ट प्रबंधन में सबसे अधिक प्राथमिकता किसे दी जाती है?
A. अंतिम निपटान B. भस्मीकरण C. पुनर्चक्रण D. अपशिष्ट उत्पन्न होने से रोकना
कथन: जलवायु परिवर्तन सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। कारण: जलवायु संवेदनशीलता और ऐतिहासिक उत्तरदायित्व समान रूप से वितरित नहीं हैं।
A. दोनों सही हैं और कारण सही व्याख्या है। B. दोनों सही हैं, लेकिन कारण सही व्याख्या नहीं है। C. कथन सही, कारण गलत है। D. कथन गलत, कारण सही है।
एक-पृष्ठ त्वरित पुनरावृत्ति
- विकास
- सतत विकास
- अर्थव्यवस्था + समाज + पर्यावरण
- प्रदूषण
- जलवायु परिवर्तन
- अपशिष्ट
- आपदा
- भारतीय कानूनों का क्रम
- अंतरराष्ट्रीय कालक्रम
- प्रमुख संबंध
- परीक्षा दृष्टिकोण
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